बुद्ध पुनर्जन्म को मानते थे: नव-बौद्धों की धूर्तता और झूठ का पर्दाफाश

भूमिका: नव-बौद्धों की चालाकी को उजागर करने का समय आ गया है!

बौद्ध धर्म पर एक बड़ा झूठ फैलाया गया है कि “बुद्ध पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते थे।” यह दावा न केवल त्रुटिपूर्ण है बल्कि बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों का मज़ाक उड़ाता है। और जो लोग इस झूठ को सबसे ज़्यादा फैलाते हैं, वे हैं नव-बौद्ध, जो अपनी सुविधानुसार बुद्ध की शिक्षाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।

लेकिन क्या आपने गौर किया है कि जब भी बुद्ध के पुनर्जन्म को मानने के प्रमाण दिए जाते हैं, तो ये नव-बौद्ध कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? ये लोग हर प्रमाण को नकारने के लिए एक ही बहाना देते हैं – “यह बाद में जोड़ा गया है!”

इस ब्लॉग में हम पहले नव-बौद्धों की इस धूर्त चालाकी को उजागर करेंगे, फिर त्रिपिटक और ऐतिहासिक प्रमाणों से दिखाएंगे कि बुद्ध पुनर्जन्म को मानते थे। आज इस झूठ को जड़ से उखाड़ फेंकने का समय आ गया है!

इस विषय में हमारा यह वीडियो द्रष्टव्य है –

भाग 1: नव-बौद्धों की गोल-गोल घूमने वाली मूर्खता (Circular Reasoning) और उनके झूठ की असलियत

1. “पुनर्जन्म ब्राह्मणवादी विचार है” – यह झूठ है!

  • पुनर्जन्म सिर्फ ब्राह्मणवादी नहीं, बल्कि जैन, आजीविक, और बौद्ध परंपराओं का मूल सिद्धांत था।
  • बुद्ध ने वेदांत के ‘अविद्या-आत्मवाद’ को खारिज किया लेकिन कर्म और पुनर्जन्म को बरकरार रखा।
  • बुद्धघोष (Buddhaghosa), नागार्जुन (Nāgārjuna) और वसुबंधु (Vasubandhu) जैसे महान बौद्ध आचार्यों ने पुनर्जन्म को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया।

अगर पुनर्जन्म बौद्ध धर्म का हिस्सा नहीं था, तो इन बौद्ध आचार्यों ने इसे क्यों स्वीकार किया?

2. नव-बौद्ध पुनर्जन्म को वैचारिक कारणों से अस्वीकार करते हैं, न कि तर्क से

  • नव-बौद्ध पुनर्जन्म को इसलिए नकारते हैं क्योंकि यह उनकी राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ है।
  • अगर पुनर्जन्म सही माना गया, तो उनका ‘बौद्ध धर्म हिन्दू धर्म के प्रतिकूल है वाला एजेंडा’ ध्वस्त हो जाएगा।
  • वे अंबेडकर को प्रमाण मानते हैं, लेकिन त्रिपिटक को नहीं!
  • नव बौद्धों की धूर्तता – जैसे ही त्रिपिटक से ऐसे प्रमाण दिखाए जाते हैं जो उनके अजेंडे के प्रतिकूल है वो “ये बाद में जोड़ा गया” कह के खिसक जाते हैं | फिर वो कलाम सुत्त के पीछे छिपने की कोशिश करते हैं जहाँ भगवान् बुद्ध ने तर्क के आधार पर बातों को स्वीकार करने को कहा है और कहा है की उनकी या परंपराप्राप्त बातों को भी श्रद्धा के कारण स्वीकार नहीं करना चाहिए ! लेकिन अगर त्रिपिटक ही प्रमाण नहीं है तो फिर कलाम सुत्त भी कैसे प्रामाणिक हो सकता है ? अगर त्रिपिटक के पुनर्जन्म के उद्धरण बाद में जोड़े गए थे तो फिर हम यही क्यों न मान ले की कलाम सुत्त ही बाद में जोड़ा गया था ? और क्या ये नव बौद्ध निर्वाण और बुद्धत्व को मानते हैं या नहीं जो कि विज्ञान से प्रमाणित नहीं है ?

अगर आप अंबेडकर को बिना तर्क स्वीकार कर सकते हैं, तो बुद्ध के शब्दों को क्यों नहीं?

3. नव-बौद्धों का छिपा हुआ भौतिकवादी (Materialist) पूर्वाग्रह

  • बौद्ध धर्म कभी भी कट्टर भौतिकवादी (Materialist) नहीं था।
  • नव-बौद्धों की मानसिकता पश्चिमी भौतिकवाद और नास्तिकतावाद से प्रेरित है, जो मूल बौद्ध परंपरा के खिलाफ है।
  • अगर नव-बौद्ध पुनर्जन्म को अस्वीकार करते हैं, तो क्या वे निर्वाण (Nibbana) को भी अस्वीकार करेंगे, क्योंकि वह भी प्रत्यक्ष अनुभव से बाहर है?
  • भौतिकवाद स्वयं अप्रमाणित सिद्धांत है। विज्ञान ने यह सिद्ध नहीं किया कि मृत्यु के बाद चेतना समाप्त हो जाती है। डेविड चाल्मर्स (David Chalmers) का ‘Hard Problem of Consciousness’ यह दिखाता है कि भौतिकवाद चेतना के अनुभव को नहीं समझा सकता।
  • डॉ. इयान स्टीवेंसन और डॉ. जिम टकर ने पुनर्जन्म पर वैज्ञानिक शोध किया, जिसमें कई मामलों में पुनर्जन्म के प्रमाण मिले।
  • नियर डेथ एक्सपीरियंस (NDE) और क्वांटम कॉन्शियसनेस की शोध भी पुनर्जन्म की संभावना को स्वीकार करती है।

अगर विज्ञान भी पुनर्जन्म को खारिज नहीं कर रहा, तो नव-बौद्ध इसे बिना प्रमाण के कैसे खारिज कर सकते हैं?

अगर वे तर्क के नाम पर पुनर्जन्म को नकारते हैं, तो उन्हें बुद्ध की अन्य अलौकिक शिक्षाओं को भी अस्वीकार करना होगा!

4. नव-बौद्धों से अनुत्तरित प्रश्न

“क्या आप कोई एक भी ऐतिहासिक या ग्रंथीय प्रमाण दिखा सकते हैं जो सिद्ध करे कि प्रारंभिक बौद्ध धर्म पुनर्जन्म को अस्वीकार करता था?”

“क्या आप यह सिद्ध कर सकते हैं कि प्रारंभिक बौद्ध भिक्षुओं ने सर्वसम्मति से पुनर्जन्म का उल्लेख करने वाले ग्रंथों को अस्वीकार कर दिया था?”

“क्या आप एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत ऐतिहासिक सूची प्रदान कर सकते हैं जो ‘मूल’ बौद्ध ग्रंथों को परिभाषित करती है?”

“यदि आप त्रिपिटक के कुछ हिस्सों को अस्वीकार करते हैं, तो इसका निर्णय करने के लिए आप कौन सा मानदंड अपनाते हैं?”

“आप तर्क को कैसे परिभाषित करते हैं? क्या आप तर्क को केवल भौतिकवादी नजरिए से देखते हैं?”

अगर वे इन प्रश्नों के उत्तर नहीं दे सकते, तो उनकी पूरी विचारधारा ही निराधार है!

भाग 2: बौद्ध ग्रंथों में पुनर्जन्म के प्रमाण (Rebirth in Buddhist Texts)

1. उत्तर तंत्र शास्त्रम

    यह बौद्ध धर्म के वज्रयान मार्ग का एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है | दलाई लामा भी तंत्र ग्रंथों पर लिखते हैं |

    Uttar Tantra Shaastram Chapter 4 on Narak (Hell)
    Uttar Tantra Shaastram Chapter 4 on Narak (Hell)
    Uttar Tantra Shaastram Chapter 4 on Narak (Hell)
    Uttar Tantra Shaastram Chapter 4 on Swarg (Heaven)
    Uttar Tantra Shaastram Chapter 4 on Heaven (Swarg)

    इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

    Uttar Tantra Shaastram hindi free pdf download

    2. चण्ड महारोषन तंत्र

      इसके सातवें पटल को देखें | इसमें नरक की बात की गयी है –

      Chanda Maharoshan Tantra, Patal 7 on Narak (Hell)

      पहले पटल में भी कहा गया है –

      Chanda Maharoshan Tantra, Patal 1 on Narak (Hell)
      Chanda Maharoshan Tantra, Patal 1 on Narak (Hell)

      इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

      Chanda Maharoshan Tantra pdf free download

      3. धम्मपद

      इसके दंड वग्गो में ज्ञानी व्यक्ति को सताने पर नरक में जाने की बात कही गयी है-

        Dhammapada on Hell (Narak)

        इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

        Dhammapada translated by Vipasasana Research Institute pdf free download

        4. महासीहनाद सुत्त

        सुत्त पिटक के दीघ निकाय में महासीहनाद सुत्त आया है | इसमें मरने के बाद, देहपात के अनन्तर स्वर्ग अथवा नर्क मिलना कहा गया है |

        Mahasinhanad Sutta of Sutta Pitak on narak and reincarnation

        इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

        Deegh Nikay of Sutt Pitak free download pdf

          5. सामण्य फल सुत्त

          दीघ निकाय में भगवान् बुद्ध की लम्बी शिक्षाएं विस्तार से आयी हैं | इस सुत्त में उन्होंने बुद्धत्व प्राप्ति के बाद अनेक पूर्वजन्मों की स्मृति आने की बात कही है-

          Samanna Phal Sutta of Deegh Nikaya in Sutta Pitak
          Samanna Phal Sutta of Deegh Nikaya in Sutta Pitak on reincarnation

          उपरोक्त ग्रन्थ जहाँ पर महासीहनाद सुत्त आया है, उसी ग्रन्थ में यह सुत्त भी है |

          दीघ निकाय पर भिक्षु जगदीश कश्यप और राहुल सांकृत्यायन के अनुवाद में भी प्रायः यही बात कही गयी है |

          Samanna Phal Sutta of Deegh Nikaya in Sutta Pitak translated by Rahul Sankrityayan

          दीघ निकाय पर भिक्षु जगदीश कश्यप और राहुल सांकृत्यायन के अनुवाद को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Deegh Nikay of Sutta Pitak translated by Rahul Sankrityayan and Bhikshu Jagdish Kashyap free download pdf

          6. विनय पिटक – महावग्ग

          देवदत्त ने भगवान् बुद्ध के साथ द्रोह किया और उनके नरक जाने की बात स्पष्ट रूप से विनय पिटक – चूल वग्ग में वर्णित है (राहुल सांकृत्यायन कृत विनय पिटक अनुवाद का पृष्ठ 492)

          Vinay Pitak Devdatt goes to narak (Hell)

          इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Vinay pitak translated by Rahul Sankrityayan pdf free

          7. देवदूत सुत्त

          सुत्त पिटक के मज्झिम निकाय में देवदूत सुत्त आया है | इसमें स्पष्ट शब्दों में नरक, यमराज और ब्राह्मण धर्म का नाम आया है (जिसे नव बौद्ध बमन सिद्ध करने की नाकाम कोशिश करते हैं ) !

          Devdoot Sutt of Majjhim NIkaya of Sutta Pitak
          Devdoot Sutt of Majjhim NIkaya of Sutta Pitak on hell, yamraj

          सुत्त पिटक के मज्झिम निकाय पर चार खण्डों में द्वारिकादास शास्त्री जी की टीका उपलब्ध है | उसके तीसरे खंड में यह देवदूत सुत्त आया है, जिसे आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Majjhim nikay translated by Dwarikadas Shastri pdf free

          प्रायः ऐसा ही अनुवाद राहुल सांकृत्यायन ने भी किया है –

          Devdoot Sutt of Majjhim NIkaya of Sutta Pitak translated by Rahul Sankrityayan

          सुत्त पिटक के मज्झिम निकाय पर राहुल सांकृत्यायन कृत अनुवाद आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Majjhim nikay translated by Rahul Sankrityayan free pdf

          8. अभिसमय संयुतं

          सुत्त पिटक के संयुत्त निकाय में अभिसमय संयुतं आया है | सुत्त पिटक के संयुत्त निकाय पर द्वारिकादास शास्त्री जी का अनुवाद तीन खण्डों में प्राप्त होता है | उसके दूसरे खंड के पृष्ठ 558 पर आगे के सात जन्मों की बात आयी है |

          Abhisamay Sanyuttn of Sutta pitak samyutt nikay translated by Dwarika Das Shastri

          इस ग्रन्थ को आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Abhisamay Sanyuttn of Sutta pitak samyutt nikay translated by Dwarika Das Shastri free pdf download

          प्रायः ऐसा ही अनुवाद राहुल सांकृत्यायन ने भी किया है –

          Abhisamay Sanyuttn of Sutta pitak samyutt nikay translated by Rahul Sankrityayan

          इस संयुत्त निकाय पर दो खण्डों में राहुल सांकृत्यायन की टीका आती है | उसके पहले खंड में यह आया है जिसे आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Sanyutt nikay translated by rahul sankrityayan free pdf

          9. निब्बेधिक सुत्त

          सुत्त पिटक के अंगुत्तर निकाय के छक्क निपात के महावग्ग में निब्बेधिक सुत्त आया है |

          Nibbedhik Sutt of Anguttar Nikay translated by Dwarikadas Shastri

          सुत्त पिटक के अंगुत्तर निकाय पर श्री द्वारिकादास शास्त्री की चार खण्डों में अनुवाद प्रकाशित है | उसके तीसरे खंड के पृष्ठ 151 पर यह निब्बेधिक सुत्त आया है जिसे आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Anguttar Nikay translated by Dwarikadas Shastri free pdf download

          प्रायः यही अनुवाद भदन्त आनंद कौशल्यायन ने भी किया है, जो कि बौद्ध धर्म के एक प्रामाणिक विद्वान् माने जाते हैं (जब तक उनका अनुवाद नव बौद्धों के अजेंडे के खिलाफ न चला जाए )-

          Nibbedhik Sutt of Anguttar Nikay translated by Bhadant Anand Kausalyayan

          सुत्त पिटक के अंगुत्तर निकाय पर भदन्त आनंद कौशल्यायन की चार खण्डों में अनुवाद प्रकाशित है | उसके तीसरे खंड के पृष्ठ 110-111 पर यह निब्बेधिक सुत्त आया है जिसे आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं –

          Anguttar Nikay  3 translated by Bhadant Anand Kausalyayan free pdf download

          पुनर्जन्म और आधुनिक विज्ञान:

          • डॉ. इयान स्टीवेंसन और डॉ. जिम टकर ने पुनर्जन्म पर वैज्ञानिक शोध किया, जिसमें कई मामलों में पुनर्जन्म के प्रमाण मिले।
          • नियर डेथ एक्सपीरियंस (NDE) और क्वांटम कॉन्शियसनेस की शोध भी पुनर्जन्म की संभावना को स्वीकार करती है।

          अगर विज्ञान भी पुनर्जन्म को खारिज नहीं कर रहा, तो नव-बौद्ध इसे बिना प्रमाण के कैसे खारिज कर सकते हैं?

          ब्राह्मण शब्द से ग्रंथों को नकारना असंगत है

          यदि ब्राह्मण शब्द का उपयोग किसी ग्रंथ को ‘ब्राह्मणवादी’ बनाता है, तो पूरा त्रिपिटक भी नकली घोषित करना पड़ेगा, क्योंकि इसमें ब्राह्मण, कर्म, देवता और धर्म का उल्लेख बार-बार हुआ है।

          अंबेडकर की राय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है

          • यदि अंबेडकर के तर्क का समान रूप से उपयोग किया जाए, तो बौद्ध धर्म के अधिकांश तत्व—कर्म, धर्म और ध्यान—भी अस्वीकार करने पड़ेंगे, क्योंकि वे वैदिक परंपरा में भी पाए जाते हैं।

          नव-बौद्धों को तय करना होगा कि वे इतिहास और तर्क के आधार पर बौद्ध धर्म मान रहे हैं या केवल अंबेडकर की राय के आधार पर एक नया पंथ बना रहे हैं।


          भाग 3: नव-बौद्धों की मानसिक गुलामी और अंतिम चोट

          “अब सबसे बड़ा सवाल – नव-बौद्ध इतने मूर्ख क्यों हैं?”

          • इन्हें इतिहास नहीं पढ़ना, बस अंबेडकर की किताब का एक पैराग्राफ पकड़कर पूरा धर्म बदलना है।
          • अगर अंबेडकर ने कहा होता कि बुद्ध जीवित नहीं थे, तो ये बुद्ध को भी फर्जी मान लेते!
          • इन्हें पश्चिमी नास्तिकों और कम्युनिस्टों ने पाला-पोसा है, ताकि ये वास्तविक बौद्ध धर्म को नष्ट कर सकें।

          अगर अंबेडकर के तर्क का समान रूप से उपयोग किया जाए, तो बौद्ध धर्म के अधिकांश तत्व—कर्म, धर्म और ध्यान—भी अस्वीकार करने पड़ेंगे, क्योंकि वे वैदिक परंपरा में भी पाए जाते हैं।

          अंतिम निष्कर्ष: नव-बौद्धों की मूर्खता को उजागर करना जरूरी है

          🚀 अब नव-बौद्धों का झूठ ज्यादा दिन नहीं टिकेगा! सत्य की जीत निश्चित है!

          “अगर ये ब्लॉग पढ़ने के बाद भी कोई नव-बौद्ध अपने भ्रम में बना रहता है, तो इसका इलाज बौद्ध धर्म में नहीं, मनोरोग विभाग में मिलेगा!”

          🔴 “ध्यान रखिए – सत्य को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता!”

          1 thought on “बुद्ध पुनर्जन्म को मानते थे: नव-बौद्धों की धूर्तता और झूठ का पर्दाफाश”

          1. Pingback: मृत्यु के पार क्या है?: तीन प्रश्न जिन्होंने आत्मा की धारणा को हिला कर रख दिया - शास्त्र

          Comments are closed.